koo-e-qaatil hai magar jaane ko jee chahe hai | कू-ए-क़ातिल है मगर जाने को जी चाहे है

  - Kaleem Aajiz
कू-ए-क़ातिलहैमगरजानेकोजीचाहेहै
अबतोकुछफ़ैसलाकरजानेकोजीचाहेहै
लोगअपनेदर-ओ-दीवारसेहोशियाररहें
आजदीवानेकाघरजानेकोजीचाहेहै
दर्दऐसाहैकिजीचाहेहैज़िंदारहिए
ज़िंदगीऐसीकिमरजानेकोजीचाहेहै
दिलकोज़ख़्मोंकेसिवाकुछदियाफूलोंने
अबतोकाँटोंमेंउतरजानेकोजीचाहेहै
छाँववा'दोंकीहैबसधोकाहीधोकादिल
मतठहरगरचेठहरजानेकोजीचाहेहै
ज़िंदगीमेंहैवोउलझनकिपरेशाँहोकर
ज़ुल्फ़कीतरहबिखरजानेकोजीचाहेहै
क़त्लकरनेकीअदाभीहसींक़ातिलभीहसीं
भीमरनाहोतोमरजानेकोजीचाहेहै
जीयेचाहेहैकिपूछूँकभीउनज़ुल्फ़ोंसे
क्यातुम्हाराभीसँवरजानेकोजीचाहेहै
रसन-ओ-दारइधरकाकुल-ओ-रुख़्सारउधर
दिलबतातेराकिधरजानेकोजीचाहेहै
  - Kaleem Aajiz
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy