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"Nadeem khan' Kaavish"
sabhi ko yaad karte hain vo jis-jis ne diya dhokha
sabhi ko yaad karte hain vo jis-jis ne diya dhokha | सभी को याद करते हैं, वो जिस-जिस ने दिया धोखा
- "Nadeem khan' Kaavish"
सभी
को
याद
करते
हैं,
वो
जिस-जिस
ने
दिया
धोखा
मगर
उनके
दिलों
से
भी
शिकायत
ही
न
हो
पाई
- "Nadeem khan' Kaavish"
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ख़ास
तो
कुछ
भी
नहीं
बदला
तुम्हारे
बाद
में
पहले
गुम
रहता
था
तुम
में,
अब
तुम्हारी
याद
में
मोल
हासिल
हो
गया
है
मुझको
इक-इक
शे'र
का
सब
दिलासे
दे
रहे
हैं
मुझको
"जस्सर"
दाद
में
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Avtar Singh Jasser
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चुपके
चुपके
रात
दिन
आँसू
बहाना
याद
है
हम
को
अब
तक
आशिक़ी
का
वो
ज़माना
याद
है
Hasrat Mohani
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वफ़ा
करेंगे
निबाहेंगे
बात
मानेंगे
तुम्हें
भी
याद
है
कुछ
ये
कलाम
किस
का
था
Dagh Dehlvi
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तेरी
मजबूरियाँ
दुरुस्त
मगर
तूने
वा'दा
किया
था
याद
तो
कर
Nasir Kazmi
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बैठे
बिठाए
हम
को
सनम
याद
आ
गए
फिर
उन
के
साथ
उन
के
करम
याद
आ
गए
कोई
जो
राह
चलते
अचानक
मिला
मियाँ
हम
को
हर
एक
रंज-ओ-अलम
याद
आ
गए
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shaan manral
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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दिलों
को
तेरे
तबस्सुम
की
याद
यूँँ
आई
कि
जगमगा
उठें
जिस
तरह
मंदिरों
में
चराग़
Firaq Gorakhpuri
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अब
तो
उन
की
याद
भी
आती
नहीं
कितनी
तन्हा
हो
गईं
तन्हाइयाँ
Firaq Gorakhpuri
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सुबूत
है
ये
मोहब्बत
की
सादा-लौही
का
जब
उस
ने
वा'दा
किया
हम
ने
ए'तिबार
किया
Josh Malihabadi
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कैसे
किसी
की
याद
हमें
ज़िंदा
रखती
है
एक
ख़याल
सहारा
कैसे
हो
सकता
है
Jawwad Sheikh
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नई
जान
हमको
मिली
शा'इरी
से
अलग
शान
हमको
मिली
शा'इरी
से
कोई
जानता
ही
नहीं
था
हमें
तो
ये
पहचान
हमको
मिली
शा'इरी
से
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"Nadeem khan' Kaavish"
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अजब
से
झूठ
कहता
हूँ
मैं
सब
से
झूठ
कहता
हूँ
किसी
ने
सच
नहीं
माना
तो
जब
से
झूठ
कहता
हूँ
वकीलों
से
भी
यारी
हैं
अदब
से
झूठ
कहता
हूँ
किया
था
इश्क़
मैंने
भी
सो
तब
से
झूठ
कहता
हूँ
यक़ीं
मत
कर
तू
ऐ
दुनिया
मैं
रब
से
झूठ
कहता
हूँ
मेरी
ये
बात
सच
है
बस
मैं
सब
से
झूठ
कहता
हूँ
तुझे
सबकुछ
बता
दूँ
क्या
कि
कब
से
झूठ
कहता
हूँ
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"Nadeem khan' Kaavish"
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अब
तक
समझ
न
पाया
मैं
आख़िर
कि
क्या
थे
तुम
पापा
मुझे
बताओ
तो
किसका
लिखा
थे
तुम
तुम
में
जो
बात
थी
वो
किसी
में
नहीं
मिली
इक
आदमी
की
शक्ल
में
जैसे
ख़ुदा
थे
तुम
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"Nadeem khan' Kaavish"
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जब
से
दिल
का
लगाना
हुआ
इक
गली
में
ठिकाना
हुआ
हम
तो
आँखों
से
मारे
गए
वज़ह
घूँघट
उठाना
हुआ
दिल
को
तन्हा
जो
सबने
किया
फिर
तेरा
आना-जाना
हुआ
लाख
कोशिश
की
हमने
मगर
दिल
तेरा
ही
दिवाना
हुआ
तेरी
यादों
के
साए
में
फिर
सिगरटों
का
जलाना
हुआ
अब
तो
हँसते
ही
रहते
हैं
हम
मुस्कुराए
ज़माना
हुआ
तुझको
छू
कर
के
बस
फिर
नदीम
इक
ग़ज़ल
गुनगुनाना
हुआ
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"Nadeem khan' Kaavish"
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मेरे
वतन
को
इन
सियासी
लोगों
ने
ही
खा
लिया
ख़बर
में
अब
ख़बर
कहाँ,
वही
दो-चार
रहते
हैं
"Nadeem khan' Kaavish"
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