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"Nadeem khan' Kaavish"
jab se dil ka lagana hua
jab se dil ka lagana hua | जब से दिल का लगाना हुआ
- "Nadeem khan' Kaavish"
जब
से
दिल
का
लगाना
हुआ
इक
गली
में
ठिकाना
हुआ
हम
तो
आँखों
से
मारे
गए
वज़ह
घूँघट
उठाना
हुआ
दिल
को
तन्हा
जो
सबने
किया
फिर
तेरा
आना-जाना
हुआ
लाख
कोशिश
की
हमने
मगर
दिल
तेरा
ही
दिवाना
हुआ
तेरी
यादों
के
साए
में
फिर
सिगरटों
का
जलाना
हुआ
अब
तो
हँसते
ही
रहते
हैं
हम
मुस्कुराए
ज़माना
हुआ
तुझको
छू
कर
के
बस
फिर
नदीम
इक
ग़ज़ल
गुनगुनाना
हुआ
- "Nadeem khan' Kaavish"
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हम
तो
बचपन
में
भी
अकेले
थे
सिर्फ़
दिल
की
गली
में
खेले
थे
Javed Akhtar
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दिल
गया
रौनक़-ए-हयात
गई
ग़म
गया
सारी
काएनात
गई
Jigar Moradabadi
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बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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शक
है
तुझे
अगर
ये
अब
भी
गुदाज़
है
दिल
तो
सीने
से
कभी
ये
पत्थर
निकाल
मेरा
Abhay Aadiv
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कहानी
भी
नहीं
है
दिल
में
कोई
सो
कुछ
भी
इन
दिनों
अच्छा
नहीं
है
मैं
अब
उकता
गया
हूँ
ज़िन्दगी
से
मेरा
जी
अब
कहीं
लगता
नहीं
है
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Ritesh Rajwada
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न
तेरे
आने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
न
दिल
लगाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
क़सम
ख़ुदा
की
बताता
हूँ
राज़
ये
तुमको
नहारी
खाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
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Paplu Lucknawi
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हम
लबों
से
कह
न
पाए
उन
से
हाल-ए-दिल
कभी
और
वो
समझे
नहीं
ये
ख़ामुशी
क्या
चीज़
है
Nida Fazli
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कैसा
दिल
और
इस
के
क्या
ग़म
जी
यूँँ
ही
बातें
बनाते
हैं
हम
जी
Jaun Elia
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जैसे
तू
हुक्म
करे
दिल
मिरा
वैसे
धड़के
ये
घड़ी
तेरे
इशारों
से
मिला
रक्खी
है
Anwar Masood
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हम
मिल
के
आ
गए
मगर
अच्छा
नहीं
लगा
फिर
यूँँ
हुआ
असर
कि
घर
अच्छा
नहीं
लगा
इक
बार
दिल
में
तुझ
सेे
जुदाई
का
डर
बना
फिर
दूसरा
कोई
भी
डर
अच्छा
नहीं
लगा
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Shriyansh Qaabiz
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नया
कोई
'आशिक़
बनाया
गया
ये
प्यारा
सा
रिश्ता
जलाया
गया
सजी
थी
उदासी
की
महफ़िल
जहाँ
वहाँ
पर
हमें
ही
बुलाया
गया
हमीं
थे
जो
क़िस्से
में
लाये
तुझे
हमीं
को
ये
क़िस्सा
सुनाया
गया
हटा
दी
थी
तस्वीर
उसने
मेरी
वहाँ
इक
ग़ज़ल
को
लगाया
गया
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"Nadeem khan' Kaavish"
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यहाँ
हर
शख़्स
रहता
है
गुमाँ
में
बहुत
दुश्वारियाँ
है
इस
जहाँ
में
बहुत
हैरत
से
चारों
ओर
देखा
है
मेरा
घर
नहीं
मेरे
मकाँ
में
इसी
उम्मीद
पे
ज़िंदा
रहे
हम
कि
तुम
सेे
फिर
मिलेंगे
आसमाँ
में
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"Nadeem khan' Kaavish"
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तेरी
आँखों
में
कामिल
डूबकर
ही
मर
गया
कोई
बताओ
इस
तरह
से
भी
ख़ुदा
के
घर
गया
कोई
"Nadeem khan' Kaavish"
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हमारी
ग़ज़ल
को
ग़ज़ल
ही
न
समझो
हमारी
ग़ज़ल
में
हैं
साया
किसी
का
"Nadeem khan' Kaavish"
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बात
ये
है
कि
अब
हर
बात
में
ही
मैं
मुस्कुराता
हूँ
लेकिन
ख़ुश
नहीं
होता
"Nadeem khan' Kaavish"
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