vahii kuchh zindagi men zindagi ka bhed paate hain | वही कुछ ज़िंदगी में ज़िंदगी का भेद पाते हैं

  - Kaif Moradaabadi
वहीकुछज़िंदगीमेंज़िंदगीकाभेदपातेहैं
जोपैहमजुस्तुजूकरतेहैंबरसोंग़मउठातेहैं
जोसचपूछोतोख़ुदजीतेहैंऔरजीनासिखातेहैं
वोदीवानेजोहरतूफ़ान-ए-ग़ममेंमुस्कुरातेहैं
कुछइसअंदाज़सेवोअपनीमहफ़िलमेंबुलातेहैं
किइंसाँकेक़दमउठनेसेपहलेकाँपजातेहैं
वोपिछलीशबकोअपनेरुख़सेजबपर्दाउठातेहैं
मिराएहसासशाहिदहैदो-आलमझूमजातेहैं
तअ'ज्जुबक्यूँहैमेरीबे-ख़ुदीपरअहल-ए-महशरको
वोजिसकोभीपिलातेहैंकुछऐसीहीपिलातेहैं
नहींकुछख़ाक-ए-दिललेकिनपहुँचकरउनकेदामनतक
यहीज़र्रेमह-ओ-ख़ुर्शीदबनकरजगमगातेहैं
मोहब्बतइब्तिदाता-इंतिहाइरफ़ान-ए-कामिलहै
मगरहमतोउन्हेंपानेसेपहलेखोएजातेहैं
तिराकूचाहीक्यूँरहरहकेपैहमयादआताहै
इसीआलममेंआलमऔरभीतोपाएजातेहैं
शिकायतकररहेहो'कैफ़'तुमकोशुक्रलाज़िमहै
वोमुश्किलसेकिसीकोअपनादीवानाबनातेहैं
  - Kaif Moradaabadi
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