kya dilkashi hai anjum-o-khurshid-o-maah men | क्या दिलकशी है अंजुम-ओ-ख़ुर्शीद-ओ-माह में

  - Kaif Moradaabadi
क्यादिलकशीहैअंजुम-ओ-ख़ुर्शीद-ओ-माहमें
ऐसेजानेकितनेहैंइसजल्वा-गाहमें
जन्नतख़यालमेंहैदुनियानिगाहमें
क्यालज़्ज़तेंमिलीहैंग़म-ए-बे-पनाहमें
दिलकोरहेशुऊ'रजोहाल-ए-तबाहमें
मेराज-ए-ज़िंदगीहैग़म-ए-बे-पनाहमें
क्याजानेक्याअसरथाकिसीकीनिगाहमें
सौहुस्नगएमिरेहाल-ए-तबाहमें
मुझसेनिगाहफेरकेक्यूँजारहेहोतुम
मेरीतोज़िंदगीहैतुम्हारीनिगाहमें
मेआ'र-ए-बंदगी-ए-बशरहीबदलदिया
कुछरिंदगएथेकिसीख़ानक़ाहमें
रहमतकोभीमुआविन-ए-ग़फ़लतबनादिया
यूँँभीकोईआएफ़रेब-ए-गुनाहमें
ईमानऔरकुफ़्रकाझगड़ाहीखोदिया
वोजबकभीसमाएकिसीकीनिगाहमें
तेरीनज़रकीख़ैरहोकितनेहीआइने
टूटेहुएपड़ेहैंमोहब्बतकीराहमें
हमदोनोंमहव-ए-शौक़मेंलेकिनमआल-ए-शौक़
उनकीनिगाहमेंहैमेरीनिगाहमें
ऐसेअदबसेदेखरहेहैंवोआइना
हाज़िरहोजैसेकोईकिसीबारगाहमें
पैग़म्बरीरज़ा-ए-इलाहीहैवर्ना'कैफ़'
याक़ूबदेखसकतेथेयूसुफ़कोचाहमें
  - Kaif Moradaabadi
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