badhe chalo ki zamaane ko ye dikh | बढ़े चलो कि ज़माने को ये दिखाना है

  - Kaif Moradaabadi
बढ़ेचलोकिज़मानेकोयेदिखानाहै
जहाँहमारेक़दमहैंवहींज़मानाहै
येहुस्न-ओ-इश्क़कीतफ़रीक़इकबहानाहै
कहींनज़रकोकहींदिलकोआज़मानाहै
अबइसजुनून-ए-तलबकाकोईठिकानाहै
किअपनेआपकोखोकरभीउनकोपानाहै
बसएकइश्क़हीऐसाशराब-ख़ानाहै
जहाँसुरूरकामफ़्हूमहोशआनाहै
इलाहीतमकनत-ए-हुस्न-ओ-नाज़-ए-हुस्नकीख़ैर
कुछआजइश्क़काअंदाज़वालिहानाहै
मैंहरगुनाहकीहक़ीक़तबतातोदूँसर-ए-हश्र
मगरउन्हेंजोहरइल्ज़ामसेबचानाहै
ज़राजुनून-ए-तमन्नासेदिलगुज़रजाए
फिरइसकेबादकोईदामहैदानाहै
मैंजानताहूँजोहैफ़र्क़-ए-ज़ात-ओ-परतव-ए-ज़ात
मिरीनिगाहपस-ए-पर्दा-ए-ज़मानाहै
किसेनसीबहोसज्दायेऔरबातहै'कैफ़'
हरइकजबींकेक़रीबउनकाआस्तानाहै
  - Kaif Moradaabadi
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