तिरीसदाकाहैसदियोंसेइंतिज़ारमुझे
मिरेलहूकेसमुंदरज़रापुकारमुझे
मैंअपनेघरकोबुलंदीपेचढ़केक्यादेखूँ
उरूज-ए-फ़नमिरीदहलीज़परउतारमुझे
उबलतेदेखीहैसूरजसेमैंनेतारीकी
नरासआएगीयेसुब्ह-ए-ज़र-निगारमुझे
कहेगादिलतोमैंपत्थरकेपाँवचूमूँगा
ज़मानालाखकरेआकेसंगसारमुझे
वोफ़ाक़ा-मस्तहूँजिसराहसेगुज़रताहूँ
सलामकरताहैआशोब-ए-रोज़गारमुझे