ye sochta hooñ ki KHud aarif-e-hayaat bhi hai | ये सोचता हूँ कि ख़ुद आरिफ़-ए-हयात भी है

  - Kaif Moradaabadi
येसोचताहूँकिख़ुदआरिफ़-ए-हयातभीहै
बशरजोमहरम-ए-असरार-ए-काएनातभीहै
नफ़सनफ़समेंरहेक्यूँइकजहान-ए-सिफ़ात
मिरीनिगाहमेंतनवीर-ए-हुस्न-ए-ज़ातभीहै
दिलोंकोमिलनहींसकतीथीइशरत-ए-अबदी
हज़ारशुक्रमोहब्बतमेंग़मकीरातभीहै
वोइकख़यालकिजिसनेग़म-ए-हयातदिया
वहीख़यालइलाज-ए-ग़म-ए-हयातभीहै
जोसिर्र-ए-इश्क़भीहैराज़-ए-हुस्न-ए-जानाँभी
यक़ींकरोमिरेदिलमेंइकऐसीबातभीहै
येहरगुनहपेजोएहसासहैनदामतका
मुझेतो'कैफ़'यहीहीला-ए-नजातभीहै
  - Kaif Moradaabadi
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