junoon-e-ishq kisi ko bhi yuñ na raas aa.e | जुनून-ए-इश्क़ किसी को भी यूँँ न रास आए

  - Kaif Moradaabadi
जुनून-ए-इश्क़किसीकोभीयूँँरासआए
वोमेरेपासतोआएमगरउदासआए
जिसेहयातकिसीरुख़सेभीरासआए
किसीकेपासजाएहमारेपासआए
वहाँसेजल्दगुज़रजाएँरहरवान-ए-हयात
जहाँभीराहमेंकोईमक़ाम-ए-यासआए
फ़िराक़-ओ-वस्लकीरूदादमुख़्तसरयेहै
कभीवोपाससेगुज़रेकभीवोपासआए
कुछऐसेलोगभीदेखेजोबज़्म-ए-जानाँमें
उदासउदासगएऔरउदासउदासआए
येइज़्तिराबनहींने'मत-ए-मुसलसलहै
ख़ुदाकरेकोईआलममुझेरासआए
किसीनेएकइशारेकोभीनहींसमझा
हुज़ूरदोस्तबहुतसेअदा-शनासआए
ग़म-ए-हयात-ओ-ग़म-ए-दहरबख़्शनेवाले
इकऐसाग़मभीअताकरजोदिलकोरासआए
अदबमें'कैफ़'कादमभीबहुतग़नीमतहै
मुहालहैकिअबऐसासुख़न-शनासआए
  - Kaif Moradaabadi
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