nazar nazar se milaai kyuuñ thii nafs nafs men sam | नज़र नज़र से मिलाई क्यूँ थी नफ़स नफ़स में समाए क्यूँ थे

  - Kaif Moradaabadi
नज़रनज़रसेमिलाईक्यूँथीनफ़सनफ़समेंसमाएक्यूँथे
उन्हेंथामंज़ूरमुझसेपर्दातोसामनेमेरेआएक्यूँथे
दयार-ए-हुस्न-ए-वफ़ा-तलबकीतरफ़क़दमहीउठाएक्यूँथे
जुनूँकोइल्ज़ामदेनेवालेजुनूँकीबातोंमेंआएक्यूँथे
इसीख़ताकीसज़ामेंअबतकनिशान-ए-मंज़िलनहींमिलाहै
रह-ए-मोहब्बतमेंअव्वलअव्वलमिरेक़दमडगमगाएक्यूँथे
वोआफ़्ताब-ए-जमालशायदयहींकहींसेगुज़ररहाहै
जहान-ए-दिलकेतमामज़र्रेअभीअभीजगमगाएक्यूँथे
नफ़सनफ़ससद-ख़लिशबद-आमालक़दमक़दमपरहज़ारतूफ़ाँ
मैंअबयेसमझाकिरोज़-ए-अव्वलवोदेखकरमुस्कुराएक्यूँथे
उन्हेंजोअब'कैफ़'सेहैशिकवाकिनज़्म-ए-आलमबिगाड़डाला
वोऐसेदीवानेकोभलाइसख़िरदकीदुनियामेंलाएक्यूँथे
  - Kaif Moradaabadi
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