haalat-e-dil vahii rahi maqsad-e-dil ko pa ke bhi | हालत-ए-दिल वही रही मक़्सद-ए-दिल को पा के भी

  - Kaif Moradaabadi
हालत-ए-दिलवहीरहीमक़्सद-ए-दिलकोपाकेभी
हमतोसुकूँपासकेउनकेक़रीबजाकेभी
इज़्न-ए-नज़ारातोदियाजुरअत-ए-दीदछीनली
वोकभीसामनेआएरुख़सेहिजाबउठाकेभी
दिलहैज़ौक़-ए-आरज़ूकोईतलबजुस्तुजू
अबवोकरेंगेक्यामुझेसाहिब-ए-दिलबनाकेभी
पास-ए-रज़ा-ए-दोस्तकोअहल-ए-वफ़ासेपूछिए
कुछज़बाँसेकहसकेउनकाइशारापाकेभी
खुलगयाराज़-ए-हाल-ए-दिलजबवोहरीम-ए-नाज़में
हमसेनज़रचुराईएसबसेनज़रमिलाकेभी
यूँँभीइकइम्तिहाँसहीजज़्ब-ए-दरून-ए-इश्क़का
कुछदिनोंदेखलीजिएदिलसेहमेंभुलाकेभी
कमहुईक्याफ़सुर्दगी'कैफ़'-ए-अलम-नसीबकी
आपनेदेखतोलियाबारहामुस्कुराकेभी
  - Kaif Moradaabadi
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