ahl-e-dil jo bhi baat kahte hain | अहल-ए-दिल जो भी बात कहते हैं

  - Kaif Moradaabadi
अहल-ए-दिलजोभीबातकहतेहैं
कोईराज़-ए-हयातकहतेहैं
उनकेग़मसेहैजावेदाँवर्ना
ज़ीस्तकोबे-सबातकहतेहैं
हाएवोदौर-ए-इश्क़जबआँसू
दास्तान-ए-हयातकहतेहैं
ख़्वाब-ए-ग़फ़लतमेंजोगुज़रताहै
हमतोउसदिनकोरातकहतेहैं
इश्क़कीइस्तिलाहमेंग़मको
इंक़लाब-ए-हयातकहतेहैं
जोभीहैंवाक़िफ़-ए-हक़ीक़त-ए-दिल
दिलकोहीकाएनातकहतेहैं
लफ़्ज़-ओ-मा'नीमेंनहींसकती
वोनज़रसेजोबातकहतेहैं
मर्द-ए-हक़मेंतोमा-सिवाकोभी
परतव-ए-हुस्न-ए-ज़ातकहतेहैं
मुद्दतोंग़ौरकरनापड़ताहै
उनसेजबदिलकीबातकहतेहैं
कार-गाह-ए-नुक़ूश-ए-इबरतको
'कैफ़'सबकाएनातकहतेहैं
  - Kaif Moradaabadi
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