ye peeli shaakh par baithe hue peele parinde | ये पीली शाख़ पर बैठे हुए पीले परिंदे

  - Kaif Ahmad Siddiqui
येपीलीशाख़परबैठेहुएपीलेपरिंदे
लरज़तीधूपकीआग़ोशमेंसह
मेंपरिंदे
ख़ुदामालूमकिसआवाज़केप्यासेपरिंदे
वोदेखोख़ामुशीकीझीलमेंउतरेपरिंदे
मिरेकमरेकीवीरानीसेउकताएपरिंदे
सुलगतीदोपहरमेंकिसतरफ़जातेपरिंदे
हिसार-ए-जिस्मसेघबराकेजबनिकलेपरिंदे
हवाकीज़दमेंकरदेरतकचीख़ेपरिंदे
ख़ुदअपनेशोला-ए-पर्वाज़सेजलतेपरिंदे
ख़ला-ए-यख़-ज़दामेंरहकेभीसुलगेपरिंदे
मिरेदस्त-ए-हवस-आलूदसेउड़तेपरिंदे
किसीशाख़-ए-जवानीतकनहींपहुँचेपरिंदे
अज़लसेइकहसींख़ुशबूकेदीवानेपरिंदे
अबदतक'कैफ़'दश्त-ए-रंगमेंभटकेपरिंदे
  - Kaif Ahmad Siddiqui
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