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Javed Aslam
mat karo girya-v-zaari
mat karo girya-v-zaari | मत करो गिरया-व-ज़ारी
- Javed Aslam
मत
करो
गिरया-व-ज़ारी
देख
तुम
को
जग
हँसेगा
ज़िन्दगी
जी
लो
नहीं
तो
वक़्त
ले
कर
चल
बसेगा
- Javed Aslam
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मैं
भूल
चुका
हूँ
कि
ये
वनवास
है
वन
है
इस
वक़्त
मेरे
सामने
सोने
का
हिरन
है
मैं
ध्यान
से
कुछ
सुन
ही
नहीं
पाऊँगा
सरकार
मैं
क्या
ही
बताऊँ
कि
मेरा
ध्यान
मगन
है
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Vikram Gaur Vairagi
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वक़्त
के
पास
हैं
कुछ
तस्वीरें
कोई
डूबा
है
कि
उभरा
देखो
Baqi Siddiqui
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उस
ने
इस
तरह
से
बदला
है
रवय्या
अपना
पूछना
पड़ता
है
हर
वक़्त,
तुम्हीं
हो
ना
दोस्त?
Inaam Azmi
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सदा
ऐश
दौराँ
दिखाता
नहीं
गया
वक़्त
फिर
हाथ
आता
नहीं
Meer Hasan
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आँख
से
दूर
न
हो
दिल
से
उतर
जाएगा
वक़्त
का
क्या
है
गुज़रता
है
गुज़र
जाएगा
Ahmad Faraz
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मैंने
जो
कुछ
भी
सोचा
हुआ
है,
मैं
वो
वक़्त
आने
पे
कर
जाऊँगा
तुम
मुझे
ज़हर
लगते
हो
और
मैं
किसी
दिन
तुम्हें
पी
के
मर
जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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कुछ
कहने
का
वक़्त
नहीं
ये
कुछ
न
कहो
ख़ामोश
रहो
ऐ
लोगों
ख़ामोश
रहो
हाँ
ऐ
लोगों
ख़ामोश
रहो
Ibn E Insha
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मुसाफ़िरों
के
दिमाग़ों
में
डर
ज़ियादा
है
न
जाने
वक़्त
है
कम
या
सफ़र
ज़ियादा
है
Hashim Raza Jalalpuri
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माँ
से
तेरे
बारे
में
और
तुझ
सेे
माँ
के
बारे
में
बातें
करके
कितना
अच्छा
वक़्त
गुज़ारा
है
मैंने
Tanoj Dadhich
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सियाह
रात
नहीं
लेती
नाम
ढलने
का
यही
तो
वक़्त
है
सूरज
तिरे
निकलने
का
Shahryar
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तोड़
कर
दिल
मिरा
अब
जा
तू
जिधर
जाएगा
वक़्त
अच्छा
न
सही,
फिर
भी
गुज़र
जाएगा
Javed Aslam
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जो
ज़मीं
ख़ुद
कभी
न
हो
साकित
उस
ज़मीं
पर
फ़राग़
क्यूँ
ढूँढूँ
Javed Aslam
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चंद
लम्हों
की
शाम
जैसे
थे
जा
के
आना
भी
सीख
लेते
तुम
Javed Aslam
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परिंदे
उड़
गए
सारे
जिधर
दाना
मुयस्सर
था
शजर
को
अब
तलक
है
आस
ये
दीवाना
लगता
है
Javed Aslam
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ज़िंदगी
का
सफ़र
तमाम
हुआ
तब
दु'आओं
का
एहतिमाम
हुआ
हमने
समझा
था
ज़िंदगी
जिसको
मुख़्तसर
सा
वो
इक
क़याम
हुआ
उम्र
तन्हा
गुज़र
गई
पर
अब
चार
काँधों
का
इंतिज़ाम
हुआ
मेरी
तुर्बत
यहाँ
हज़ारों
हैं
हसरतों
का
जो
क़त्ल-ए-'आम
हुआ
ज़िंदगी
भर
थी
जुस्तजू
जिसकी
मर
गया
मैं
तो
हम-कलाम
हुआ
नस्ल
आगे
बढ़ा,
निकल
'असलम'
इस
जहाँ
का
यही
निज़ाम
हुआ
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Javed Aslam
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