vaqt ke saath nayi soch men dhal jaate hain | वक़्त के साथ नई सोच में ढल जाते हैं

  - Jahanzeb Sahir
वक़्तकेसाथनईसोचमेंढलजातेहैं
हमवोसिक्केहैंजोहरदौरमेंचलजातेहैं
इतनेमानूसहुएमुझसेमिरेघरकेचराग़
शामहोतेहीमुझेदेखकेजलजातेहैं
देखलेताहूँजोकुछदेरतिरीआँखोंको
तेरीआँखोंसेमिरेख़्वाबबदलजातेहैं
इकतकल्लुफ़मेंलिहाफ़ोंकासहारालेकर
आस्तीनोंमेंछुपेसाँपभीपलजातेहैं
वक़्तकबहाथसेजाताहैकिसीके'साहिर'
वक़्तकेहाथसेहमलोगनिकलजातेहैं
  - Jahanzeb Sahir
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