ham aise log kahaan manzilon ko paate hain | हम ऐसे लोग कहाँ मंज़िलों को पाते हैं

  - Jahanzeb Sahir
हमऐसेलोगकहाँमंज़िलोंकोपातेहैं
हमऐसेलोगफ़क़तरास्तेबनातेहैं
येतेरेजिस्मकोछूकरपताचलाहैमुझे
किनर्मफूलबहुतजल्दसूखजातेहैं
येकामहिज्रमेंबिदअ'तशुमारहोताहै
मगरयेदेखकिहमफिरभीमुस्कुरातेहैं
तिरातोख़ैरकोईतुझसेदूरहीगया
तुझेख़बरहीनहींसाँसकैसेआतेहैं
नज़रआएँगेतुझकोग़ुबारउड़नेदे
तिरेलिएजोमुझेराहसेहटातेहैं
तुम्हारेख़्वाबग़नीमतहैंबुझतीआँखोंको
मगरयेख़्वाबहमेंनींदसेजगातेहैं
येकौनबाग़में'साहिर'दिखाईदेनेलगा
किफूलपेड़परिंदेख़ुशीमनातेहैं
  - Jahanzeb Sahir
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