pesh-khema ye kisi ek museebat ka nahin | पेश-ख़ेमा ये किसी एक मुसीबत का नहीं

  - Jahanzeb Sahir
पेश-ख़ेमायेकिसीएकमुसीबतकानहीं
दुखहैकुछऔरमिरीजानमसाफ़तकानहीं
हममज़ाफ़ातसेआएहुएलोगोंकामियाँ
मसअलारिज़्क़काहोताहैमोहब्बतकानहीं
जिस्मकीजीतकोईजीतनहींमेरेलिए
येवोसामानहैजोमेरीज़रूरतकानहीं
थोड़ीकोशिशसेहीजातीहैअबनींदमुझे
इसकामतलबहैकिवोमेरीतबीअतकानहीं
येतोख़ुदचलकेनिशानेपेलगेहैंतेरे
दख़्लइसमेंतोकोईतेरीमहारतकानहीं
रोज़दरियामेंजोइकफूलबहादेताहूँ
येकिसीदुखकाइशाराहैअक़ीदतकानहीं
हमहैंहारेहुएलश्करकेसिपाही'साहिर'
फ़ाएदाहमकोकिसीकीभीहिमायतकानहीं
  - Jahanzeb Sahir
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