ab is se badh ke mujhe aur kya suhoolat ho | अब इस से बढ़ के मुझे और क्या सुहूलत हो

  - Jahanzeb Sahir
अबइससेबढ़केमुझेऔरक्यासुहूलतहो
मैंतुझकोयादकरूँँसाँसकीभीफ़ुर्सतहो
फ़ज़ामेंसिर्फ़तिरेक़हक़हेरहेंबाक़ी
औरइसज़मीनपेतेरीतलबसलामतहो
तुम्हारेनामपेझगड़ाहोऔरइसकेबा'द
होऐसीजंगकिजिसमेंमिरीहलाकतहो
तिरेविसालकेलम्हेबिखरगएमुझसे
ख़ुदाकरेकितिरेहिज्रकीहिफ़ाज़तहो
मैंचाहताहूँकोईरास्तासुझाईदे
मैंचाहताहूँमुझेदूसरीमोहब्बतहो
लगेहुएहैंसमाअ'तकीचापलूसीमें
कोईतोहोकिजिसेबोलनेकीहाजतहो
मैंरोज़करताहूँ'साहिर'नईअदाकारी
भुलादूँजोउसेभूलनेकीनिय्यतहो
  - Jahanzeb Sahir
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