khushi bhi kis ne kaha vajh-e-gham nahin hoti | ख़ुशी भी किस ने कहा वज्ह-ए-ग़म नहीं होती

  - Jahanzeb Sahir
ख़ुशीभीकिसनेकहावज्ह-ए-ग़मनहींहोती
बतावोशामजोशाम-ए-अलमनहींहोती
हमउसजगहपेकिराएकेघरमेंरहतेहैं
हमारीरायकभीमोहतरमनहींहोती
तिरेख़यालकेआतेहीलौटनेसेलगा
हरएकचीज़उदासीमेंज़मनहींहोती
झुकेहुएहैंयेसरतोकिसीमुसीबतमें
येइकफ़क़ीरकीगर्दनहैख़मनहींहोती
जोतेरेसाथमोहब्बतथीमरगईहैवो
मगरजोतुझसेअक़ीदतहैकमनहींहोती
मैंअपनेदुखमेंबराबरशरीकहूँलेकिन
बसएकमसअलाहैआँखनमनहींहोती
बतारहीहैंपरिंदोंकीहिजरतें'साहिर'
कोईतबाहीकभीएकदमनहींहोती
  - Jahanzeb Sahir
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