KHvaab ki tarah se hai yaad ki tum aa.e the | ख़्वाब की तरह से है याद कि तुम आए थे

  - Jagan Nath Azad
ख़्वाबकीतरहसेहैयादकितुमआएथे
जिसतरहदामन-ए-मशरिक़मेंसहरहोतीहै
ज़र्रेज़र्रेकोतजल्लीकीख़बरहोतीहै
औरजबनूरकासैलाबगुज़रजाताहै
रातभरएकअँधेरेमेंबसरहोतीहै
कुछइसीतरहसेहैयादकितुमआएथे
जैसेगुलशनमेंदबेपाँवबहारआतीहै
पत्तीपत्तीकेलिएलेकेनिखारआतीहै
औरफिरवक़्तवोआताहैकिहरमौज-ए-सबा
अपनेदामनमेंलिएगर्द-ओ-ग़ुबारआतीहै
कुछइसीतरहसेहैयादकितुमआएथे
जिसतरहमहव-ए-सफ़रहोकोईवीरानेमें
औररस्तेमेंकहींकोईख़याबाँजाए
चंदलम्होंमेंख़याबाँकेगुज़रजानेपर
सामनेफिरवहीदुनिया-ए-बयाबाँजाए
कुछइसीतरहसेहैयादकितुमआएथे
  - Jagan Nath Azad
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy