jo dil ka raaz be-aah-o-fughaan kehna hi padta hai | जो दिल का राज़ बे-आह-ओ-फ़ुग़ाँ कहना ही पड़ता है

  - Jagan Nath Azad
जोदिलकाराज़बे-आह-ओ-फ़ुग़ाँकहनाहीपड़ताहै
तोफिरअपनेक़फ़सकोआशियाँकहनाहीपड़ताहै
तुझेताइर-ए-शाख़-ए-नशेमनक्याख़बरइसकी
कभीसय्यादकोभीबाग़बाँकहनाहीपड़ताहै
येदुनियाहैयहाँहरकामचलताहैसलीक़ेसे
यहाँपत्थरकोभीला'ल-ए-गिराँकहनाहीपड़ताहै
ब-फ़ैज़-ए-मस्लहतऐसाभीहोताहैज़मानेमें
किरहज़नकोअमीर-ए-कारवाँकहनाहीपड़ताहै
मुरव्वतकीक़समतेरीख़ुशीकेवास्तेअक्सर
सराब-ए-दश्तकोआब-ए-रवाँकहनाहीपड़ताहै
ज़बानोंपरदिलोंकीबातजबहमलानहींसकते
जफ़ाकोफिरवफ़ाकीदास्ताँकहनाहीपड़ताहै
पूछोक्यागुज़रतीहैदिल-ए-ख़ुद्दारपरअक्सर
किसीबे-मेहरकोजबमेहरबाँकहनाहीपड़ताहै
  - Jagan Nath Azad
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