phir laut kar ga.e na kabhi dasht-o-dar se ham | फिर लौट कर गए न कभी दश्त-ओ-दर से हम

  - Jagan Nath Azad
फिरलौटकरगएकभीदश्त-ओ-दरसेहम
निकलेबसएकबारकुछइसतरहघरसेहम
कुछदूरतकचलेहीगएबे-ख़बरसेहम
बे-ख़ुदी-ए-शौक़येगुज़रेकिधरसेहम
आज़ादबे-नियाज़थेअपनीख़बरसेहम
पलटेकुछइसतरहसेदकनकेसफ़रसेहम
क़ल्ब-ओ-नज़रकादौरबसइतनाहीयादहै
वोइकक़दमउधरसेबढ़ेथेइधरसेहम
काशयेसदाभीकभीकानमेंपड़े
उट्ठोकिलौटआएहैंअपनेसफ़रसेहम
दिलकाचमनहैकैफ़-ए-बहाराँलिएहुए
गुज़रेथेएकबारतिरीरह-गुज़रसेहम
आताहैइकसितारानज़रचाँदकेक़रीब
जबदेखतेहैंख़ुदकोतुम्हारीनज़रसेहम
इससेज़्यादादौर-ए-जुनूँकीख़बरनहीं
कुछबे-ख़बरसेआपथेकुछबे-ख़बरसेहम
जितनीभीरहगईथीकमीदिलकेदर्दमें
उतनाहीलुटगएहैंमताअ'-ए-नज़रसेहम
रोज़-ए-अज़लसेअपनीजबींमेंतड़परही
वाबस्तायूँँरहेहैंतिरेसंग-ए-दरसेहम
  - Jagan Nath Azad
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