kab is men shak mujhe hai jo lazzat hai qaal men | कब इस में शक मुझे है जो लज़्ज़त है क़ाल में

  - Jagan Nath Azad
कबइसमेंशकमुझेहैजोलज़्ज़तहैक़ालमें
लेकिनवोबातइसमेंकहाँहैजोहालमें
दिलहैमिराकिमारका-ए-कुफ़्र-ओ-दींकोई
इकउम्रकटगईहैजवाबसवालमें
अल्लाहरेबे-ख़ुदीकितिरेघरकेआस-पास
हरदरपेदीसदातिरेदरकेख़यालमें
दोनामएककैफ़ियत-ए-जज़्ब-ए-दिलकेहैं
बसफ़र्क़इसक़दरहैफ़िराक़विसालमें
आएवोकितनीबारनिगाहोंकेरू-ब-रू
उसकेलिबासमेंकभीउसकेजमालमें
  - Jagan Nath Azad
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