jaan aise KHvaabon se kis tarah chhudaauun main | जान ऐसे ख़्वाबों से किस तरह छुड़ाऊँ मैं

  - Jafar Shirazi
जानऐसेख़्वाबोंसेकिसतरहछुड़ाऊँमैं
शहरसोगयासाराअबकिसेजगाऊँमैं
पाएमालसब्ज़ेपरदेखकरगिरेपत्ते
अबज़मीनसेख़ुदकोकिसतरहउठाऊँमैं
इनअकेलीरातोंमेंइनअकेलेरस्तोंपर
किसकेसाथआऊँमैंकिसकेसाथजाऊँमैं
एकहीसीतन्हाईएकहीसासन्नाटा
दश्तक्याहैदिलक्याहैक्यातुझेबताऊँमैं
देखकैसेदिनआएदेखमैंकहताथा
तूक़रीबभीआएऔरतुझेबुलाऊँमैं
आजसबमेंघुल-मिलजाऊँमुझकोक्याख़बरकलतक
किसकोयादआऊँमैंकिसकोभूलजाऊँमैं
कितनेकामदुनियानेदेदिएमुझे'जाफ़र'
अश्क-ए-ग़मगिराऊँमैंबार-ए-ग़मउठाऊँमैं
  - Jafar Shirazi
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