zawaal-e-umr ke parde men hai hijaab kahaan | ज़वाल-ए-उम्र के पर्दे में है हिजाब कहाँ

  - Jafar Sahni
ज़वाल-ए-उम्रकेपर्देमेंहैहिजाबकहाँ
वुफ़ूर-ए-शौक़सेलबरेज़अबगुलाबकहाँ
किरनकिरनसेफ़सानाहसीनलिखताथा
चलागयावोफ़ुसूँकार-ए-आफ़ताबकहाँ
नुमूद-ए-सुब्हकोदेतासदाचलाआए
हमारीरातमेंबाक़ीहैऐसाख़्वाबकहाँ
हरइकक़दमपेख़िरदकेनिशानमिलतेहैं
तुझेछुपाकेमैंरक्खूँदिल-ए-ख़राबकहाँ
सुनहरेवक़्तमेंरेग-ए-रवाँयेफूलखिला
वोक़िस्साप्यारकालेकरगएहैंख़्वाबकहाँ
सियहसफ़ेदघटाआसमाँपेफैलीथी
परउसकेजालमेंआयावोमाहताबकहाँ
तग़य्युरातज़मानेकेउसनेबतलाए
मिरेसवालकेहक़मेंथावोजवाबकहाँ
तलाशख़्वाबमेंमेरेक़दमवोलेताथा
ज़बाँपेउसकीहैअबआपऔरजनाबकहाँ
सदा-ए-दर्दसेवाक़िफ़दिल-ए-नफ़स'जाफ़र'
कोईबताएकिहोताहैदस्तियाबकहाँ
  - Jafar Sahni
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