baitha tha tan ko dhaank ke jo garm shaal se | बैठा था तन को ढाँक के जो गर्म शाल से

  - Jafar Sahni
बैठाथातनकोढाँककेजोगर्मशालसे
मुश्किलमेंपड़गयावोसितारोंकीचालसे
ख़ामोशियोंकीराहपेहोकरकेगामज़न
रखनाकभीसोचकारिश्तामलालसे
उम्मीदऐसीउनसेमतानतकीथीनहीं
बच्चेबिगड़गएहैंबहुतदेखभालसे
दम-ख़मतोकुछनहींथाहक़ीक़तकेनामपर
घबरागयाजहानहमारीमजालसे
कुछमस्लहतकेनामपेचुपचापहमरहे
वाक़िफ़थेवर्नावक़्तकेपोशीदाहालसे
चादरपेआसमानकीबिखरीथीचाँदनी
आरास्ताज़मीनथीइसकेजमालसे
तुमशहरजारहेहोतोजाओमगरवहाँ
अरमाँमिलेंगेदेखनाबेहदनिढालसे
अफ़्सुर्दाफ़िक्रथीजोक़दामतकेख़ोलमें
शादाबहोगईहैवोरौशनख़यालसे
इकपत्तेकीबिसाततुम्हारीहै'साहनी'
मिट्टीमेंजामिलोगेजुदाहोकेडालसे
  - Jafar Sahni
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy