aarzoo aabaad hai bikhre khandar ke aas paas | आरज़ू आबाद है बिखरे खंडर के आस पास

  - Jafar Sahni
आरज़ूआबादहैबिखरेखंडरकेआसपास
दर्दकीदहलीज़परगर्द-ए-सफ़रकेआसपास
ख़ारकीहरनोककोमजरूहकरदेनेकेबा'द
लौटजानाहैमुझेबर्ग-ओ-समरकेआसपास
दीदनीहैंचाहतोंकीनर्म-ओ-नाज़ुकलग़्ज़िशें
गर्दिश-ए-अय्याममेंशाम-ओ-सहरकेआसपास
दूरइकख़ामोशबस्तीकीगलीमेंदेखना
हैतमन्नामुतमइनमख़दूशघरकेआसपास
छागईतूफ़ानकेहोंटोंपेशैतानीहँसी
देखकरकश्तीशिकस्तासीभँवरकेआसपास
जबकोईरौशननिशाँमिलतानहींहैधुँदमें
ढूँढताहूँनक़्श-ए-पाराह-ए-गुज़रकेआसपास
फूलपत्तोंकीफ़ज़ासेसजगईदुनियामरी
हैकहाँअरमाँमिरालाल-ओ-गुहरकेआसपास
बे-नियाज़ीवक़्तसेमुझमेंक़ाएमहोसकी
मैंसदाहाज़िररहाताज़ाख़बरकेआसपास
कूचा-ए-दिलदारकारंगींज़माना'साहनी'
आजभीआबादहैज़ख़्म-ए-जिगरकेआसपास
  - Jafar Sahni
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