pyaase ke paas raat samundar pada hua | प्यासे के पास रात समुंदर पड़ा हुआ

  - Iqbal Sajid
प्यासेकेपासरातसमुंदरपड़ाहुआ
करवटबदलरहाथाबराबरपड़ाहुआ
बाहरसदेखिएतोबदनहैंहरे-भरे
लेकिनलहूकाकालहैअंदरपड़ाहुआ
दीवारतोहैराहमेंसालिमखड़ीहुई
सायाहैदरमियानसेकटकरपड़ाहुआ
अंदरथीजितनीआगवोठंडीहोसकी
पानीथासिर्फ़घासकेऊपरपड़ाहुआ
हाथोंपेबहरहीहैलकीरोंकीआबजू
क़िस्मतकाखेतफिरभीहैबंजरपड़ाहुआ
येख़ुदभीआसमानकीवुसअतमेंक़ैदहै
क्यादेखताहैचाँदकोछतपरपड़ाहुआ
जलताहैरोज़शामकोघाटीकेउसतरफ़
दिनकाचराग़झीलकेअंदरपड़ाहुआ
माराकिसीनेसंगतोठोकरलगीमुझे
देखातोआसमाँथाज़मींपरपड़ाहुआ
  - Iqbal Sajid
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