ऐसे घर में रह रहा हूँ देख ले बे-शक कोई

  - Iqbal Sajid
ऐसेघरमेंरहरहाहूँदेखलेबे-शककोई
जिसकेदरवाज़ेकीक़िस्मतमेंनहींदस्तककोई
यूँँतोहोनेकोसभीकुछहैमिरेदिलमेंमगर
इसदुकाँपरआजतकआयानहींगाहककोई
वोख़ुदाकीखोजमेंख़ुदआख़िरीहदतकगया
ख़ुदकोपानेकीमगरकोशिशकीअनथककोई
बाग़मेंकलरातफूलोंकीहवेलीलुटगई
चश्म-ए-शबनमसेचुराकरलेगयाठंडककोई
देगयाआँखोंकोफ़र्श-ए-राहबननेकासिला
देगयाबीनाईकोसौग़ातमेंदीमककोई
एकभीख़्वाहिशकेहाथोंमेंमेहंदीलगसकी
मेरेजज़्बोंमेंदूल्हाबनसकाअबतककोई
वोभी'साजिद'थामेरेजज़्बोंकीचोरीमेंशरीक
उसकीजानिबक्यूँँनहींउट्ठीनिगाह-ए-शककोई
  - Iqbal Sajid
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