lagega ajnabi ab kyuuñ na shahar bhar mujh ko | लगेगा अजनबी अब क्यूँ न शहर भर मुझ को

  - Iftikhar Naseem
लगेगाअजनबीअबक्यूँशहरभरमुझको
बचागयाहैनज़रतूभीदेखकरमुझको
मैंघूमफिरकेउसीसम्तनिकलताहूँ
जकड़रहीहैतिरेघरकीरहगुज़रमुझको
झुलसरहाहैबदनज़ेर-ए-साया-ए-दीवार
बुलारहाहैकोईदश्त-ए-बे-शजरमुझको
मैंसंग-दिलहूँतुझेभूलताहीजाताहूँ
मैंहँसरहाहूँतोमिलकेउदासकरमुझको
मैंदेखताहीरहूँगातुझेकिनारेसे
तूढूँढताहीरहेगाभँवरभँवरमुझको
बनीहैंतुंदहवाओंकीज़र्ददीवारें
उड़ारहाहैमगरशो'ला-ए-सफ़रमुझको
बनादियाहैनिडरज़िद्दीख़्वाहिशोंने'नसीम'
ख़ुदए'तिमादथाअपनेआपपरमुझको
  - Iftikhar Naseem
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