शामसेतन्हाखड़ाहूँयासकापैकरहूँमैं
अजनबीहूँऔरफ़सील-ए-शहरसबाहरहूँमैं
तूतोआयाहैयहाँपरक़हक़होंकेवास्ते
देखनेवालेबड़ाग़मगीनसामंज़रहूँमैं
मैंबचालूँगातुझेदुनियाकेसर्द-ओ-गर्मसे
ढाँपलेमुझसेबदनअपनातिरीचादरहूँमैं
अबतोमिलतेहैंहवासेभीदर-ओ-दीवार-ए-जिस्म
बासियोमुझसेनिकलजाओशिकस्ता-घरहूँमैं
मैंतुम्हेंउड़तेहुएदेखूँगामेरेसाथियो
मैंतुम्हारासाथकैसेदूँशिकस्ता-परहूँमैं
मेरेहोनेकापतालेलोदर-ओ-दीवारसे
कहरहाहैघरकासन्नाटाअभीअंदरहूँमैं
कौनदेगाअबयहाँसेतेरीदस्तककाजवाब
किसलिएमुझकोसदादेताहैख़ालीघरहूँमैं