hijr ki dhoop men chaanv jaisi baatein karte hain | हिज्र की धूप में छाँव जैसी बातें करते हैं

  - Iftikhar Arif
हिज्रकीधूपमेंछाँवजैसीबातेंकरतेहैं
आँसूभीतोमाओंजैसीबातेंकरतेहैं
रस्तादेखनेवालीआँखोंकेअनहोने-ख़्वाब
प्यासमेंभीदरियाओंजैसीबातेंकरतेहैं
ख़ुदकोबिखरतेदेखतेहैंकुछकरनहींपातेहैं
फिरभीलोगख़ुदाओंजैसीबातेंकरतेहैं
एकज़रासीजोतकेबलपरअँधियारोंसेबैर
पागलदिएहवाओंजैसीबातेंकरतेहैं
रंगसेख़ुशबुओंकानाताटूटताजाताहै
फूलसेलोगख़िज़ाओंजैसीबातेंकरतेहैं
हमनेचुपरहनेकाअहदक्याहैऔरकम-ज़र्फ़
हमसेसुख़न-आराओंजैसीबातेंकरतेहैं
  - Iftikhar Arif
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy