ghairoon se daad-e-jaur-o-jafa li gaii to kya | ग़ैरों से दाद-ए-जौर-ओ-जफ़ा ली गई तो क्या

  - Iftikhar Arif
ग़ैरोंसेदाद-ए-जौर-ओ-जफ़ालीगईतोक्या
घरकोजलाकेख़ाकउड़ादीगईतोक्या
गारत-गरी-ए-शहरमेंशामिलहैकौनकौन
येबातअहल-ए-शहरपेखुलभीगईतोक्या
इकख़्वाबहीतोथाजोफ़रामोशहोगया
इकयादहीतोथीजोभुलादीगईतोक्या
मीसाक़-ए-ऐतबारमेंथीइकवफ़ाकीशर्त
इकशर्तहीतोथीजोउठादीगईतोक्या
क़ानून-ए-बाग़-बानी-ए-सहराकीसरनविश्त
लिक्खीगईतोक्याजोलिक्खीगईतोक्या
इसक़हत-ओ-इंहदाम-ए-रिवायतकेअहदमें
तालीफ़नुस्ख़ा-हा-ए-वफ़ाकीगईतोक्या
जब'मीर''मीरज़ा'केसुख़नराएगाँगए
इकबे-हुनरकीबातसमझीगईतोक्या
  - Iftikhar Arif
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