khazaana-e-zar-o-gauhar pe KHaak daal ke rakh | खज़ाना-ए-ज़र-ओ-गौहर पे ख़ाक डाल के रख

  - Iftikhar Arif
खज़ाना-ए-ज़र-ओ-गौहरपेख़ाकडालकेरख
हमअहल-ए-मेहर-ओ-मोहब्बतहैंदिलनिकालकेरख
हमेंतोअपनेसमुंदरकीरेतकाफ़ीहै
तूअपनेचश्मा-ए-बे-फ़ैज़कोसँभालकेरख
ज़रासीदेरकाहैयेउरूज-ए-माल-ओ-मनाल
अभीसेज़ेहनमेंसबज़ाविएज़वालकेरख
येबारबारकिनारेपेकिसकोदेखताहै
भँवरकेबीचकोईहौसलाउछालकेरख
जानेकबतुझेजंगलमेंरातपड़जाए
ख़ुदअपनीआगसेशो'लाकोईउजालकेरख
जवाबआएआएसवालउठातोसही
फिरइससवालमेंपहलूनएसवालकेरख
तिरीबलासेगिरोह-ए-जुनूँपेक्यागुज़री
तूअपनादफ़्तर-ए-सूद-ओ-ज़ियाँसँभालकेरख
छलकरहाहैजोकश्कोल-ए-आरज़ूउसमें
किसीफ़क़ीरकेक़दमोंकीख़ाकडालकेरख
  - Iftikhar Arif
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