ye bastii jaani-pahchaani bahut hai | ये बस्ती जानी-पहचानी बहुत है

  - Iftikhar Arif
येबस्तीजानी-पहचानीबहुतहै
यहाँवा'दोंकीअर्ज़ानीबहुतहै
शगुफ़्तालफ़्ज़लिक्खेजारहेहैं
मगरलहजोंमेंवीरानीबहुतहै
सुबुक-ज़र्फ़ोंकेक़ाबूमेंनहींलफ़्ज़
मगरशौक़-ए-गुल-अफ़्शानीबहुतहै
हैबाज़ारोंमेंपानीसरसेऊँचा
मिरेघरमेंभीतुग़्यानीबहुतहै
जानेकबमिरेसहरामेंआए
वोइकदरियाकितूफ़ानीबहुतहै
जानेकबमिरेआँगनमेंबरसे
वोइकबादलकिनुक़सानीबहुतहै
  - Iftikhar Arif
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