bastii bhi samundar bhi biyaabaan bhi mira hai | बस्ती भी समुंदर भी बयाबाँ भी मिरा है

  - Iftikhar Arif
बस्तीभीसमुंदरभीबयाबाँभीमिराहै
आँखेंभीमिरीख़्वाब-ए-परेशाँभीमिराहै
जोडूबतीजातीहैवोकश्तीभीहैमेरी
जोटूटताजाताहैवोपैमाँभीमिराहै
जोहाथउठेथेवोसभीहाथथेमेरे
जोचाकहुआहैवोगिरेबाँभीमिराहै
जिसकीकोईआवाज़पहचानमंज़िल
वोक़ाफ़िला-ए-बे-सर-ओ-सामाँभीमिराहै
वीराना-ए-मक़तलपेहिजाबआयातोइसबार
ख़ुदचीख़पड़ामैंकियेउनवाँभीमिराहै
वारफ़्तगी-ए-सुब्ह-ए-बशारतकोख़बरक्या
अंदेशा-ए-सद-शाम-ए-ग़रीबाँभीमिराहै
मैंवारिस-ए-गुलहूँकिनहींहूँमगरजान
ख़मयाज़ा-ए-तौहीन-ए-बहाराँभीमिराहै
मिट्टीकीगवाहीसेबड़ीदिलकीगवाही
यूँँहोतोयेज़ंजीरयेज़िंदाँभीमिराहै
  - Iftikhar Arif
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