gham-e-jahaan ko sharmasaar karne waale kya hue | ग़म-ए-जहाँ को शर्मसार करने वाले क्या हुए

  - Iftikhar Arif
ग़म-ए-जहाँकोशर्मसारकरनेवालेक्याहुए
वोसारीउम्रइंतिज़ारकरनेवालेक्याहुए
बहमहुएबग़ैरजोगुज़रगईंवोसाअ'तें
वोएकएकपलशुमारकरनेवालेक्याहुए
दुआ-ए-नीम-शबकीरस्मकैसेख़त्महोगई!
वोहर्फ़-ए-जाँपेए'तिबारकरनेवालेक्याहुए
कहाँहैंवोजोदश्त-ए-आरज़ूमेंख़ाकहोगए
वोलम्हा-ए-अबदशिकारकरनेवालेक्याहुए
तलबकेसाहिलोंपेजलतीकश्तियाँबताएँगी
शनावरीपेए'तिबारकरनेवालेक्याहुए
  - Iftikhar Arif
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