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Harsh saxena
vo bhi ik daur tha ki saawan men
vo bhi ik daur tha ki saawan men | वो भी इक दौर था कि सावन में
- Harsh saxena
वो
भी
इक
दौर
था
कि
सावन
में
झूले
पड़ते
थे
घर
के
आँगन
में
- Harsh saxena
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तुम्हारे
बाद
इस
आँगन
में
फूल
खिलने
पर
ख़ुशी
हुई
भी
तो
ये
दुख
हुआ
कि
दें
किसको
Mohit Dixit
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मेरे
आँगन
में
एक
बूढ़ा
पेड़
छाँव
भी
देता
है,
दुआएँ
भी
Ankit Maurya
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हुआ
करती
थी
मेरी
ईद
जिसके
दीद
से
साहिल
उतर
आया
है
देखो
चाँद
वो
ग़ैरों
के
आँगन
में
A R Sahil "Aleeg"
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मेरी
ख़्वाहिश
है
कि
आँगन
में
न
दीवार
उठे
मेरे
भाई
मेरे
हिस्से
की
ज़मीं
तू
रख
ले
Rahat Indori
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ओ
सखी
मन
उसका
तो
तन
भी
उसी
का
हक़
है
उसको
ग़ैर
ये
आँगन
न
चू
में
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Neeraj Neer
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तेरी
यादों
ने
मुझे
बदनाम
कर
रक्खा
है
कुछ
यूँँ
लोग
कहते
हैं
कि
लड़का
ये
शराबी
बन
चुका
है
Harsh saxena
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हम
को
मालूम
है
ये
सब
पगली
झुमकों
में
ढाती
हो
ग़ज़ब
पगली
धड़कने
तेज़
चलने
लगती
हैं
आती
हो
तुम
क़रीब
जब
पगली
किसकी
ख़ातिर
ग़ज़ल
सुनाते
हैं
हम
सेे
मत
पूछो
तुम
सबब
पगली
रात
यूँँ
ही
गुज़र
न
जाए
अब
हमको
बाँहों
में
लोगी
कब
पगली
हिज्र
में
ये
पता
लगा
हम
को
होती
कैसी
है
ये
तलब
पगली
इक
तिरी
याद
ने
सताया
यूँँ
हो
चुके
हैं
शराबी
लब
पगली
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Harsh saxena
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दो
मुल्कों
के
सियासी
खेल
में
जाने
यहाँ
पर
कितनों
के
घर
उजड़े
हैं
मौला
वही
हर
सुब्ह
मंज़र
देखना
पड़ता
हज़ारों
लोग
यूँँ
ही
मरते
हैं
मौला
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Harsh saxena
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काँधे
पे
उसके
सर
रखा
तो
यूँँ
लगा
मुझे
जैसे
मना
लिए
सभी
त्यौहार
होली
में
Harsh saxena
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सारे
सुर
उसकी
ख़ुशामद
में
लगे
हैं
देखिए
तो
आज
उसने
पैरों
में
पाज़ेब
जो
पहनी
हुई
है
Harsh saxena
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