vahii pyaas hai vahii dasht hai vahii ghar | वही प्यास है वही दश्त है वही घराना है

  - Iftikhar Arif
वहीप्यासहैवहीदश्तहैवहीघरानाहै
मश्कीज़ेसेतीरकारिश्ताबहुतपुरानाहै
सुब्हसवेरेरनपड़नाहैऔरघमसानकारन
रातोंरातचलाजाएजिसजिसकोजानाहै
एकचराग़औरएककिताबऔरएकउमीद-ए-असासा
उसकेबा'दतोजोकुछहैवोसबअफ़्सानाहै
दरियापरक़ब्ज़ाथाजिसकाउसकीप्यासअज़ाब
जिसकीढालेंचमकरहीथींवहीनिशानाहै
कासा-ए-शाममेंसूरजकासरऔरआवाज़-ए-अज़ाँ
औरआवाज़-ए-अज़ाँकहतीहैफ़र्ज़निभानाहै
सबकहतेहैंऔरकोईदिनयेहंगामा-ए-दहर
दिलकहताहैएकमुसाफ़िरऔरभीआनाहै
एकजज़ीराउसकेआगेपीछेसातसमुंदर
सातसमुंदरपारसुनाहैएकख़ज़ानाहै
  - Iftikhar Arif
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