dost kya KHud ko bhi pursish ki ijaazat nahin dii | दोस्त क्या ख़ुद को भी पुर्सिश की इजाज़त नहीं दी

  - Iftikhar Arif
दोस्तक्याख़ुदकोभीपुर्सिशकीइजाज़तनहींदी
दिलकोख़ूँहोनेदियाआँखकोज़हमतनहींदी
हमभीउससिलसिला-ए-इश्क़मेंबैअतहैंजिसे
हिज्रनेदुखदियावस्लनेराहतनहींदी
हमभीइकशामबहुतउलझेहुएथेख़ुदमें
एकशामउसकोभीहालातनेमोहलतनहींदी
आजिज़ीबख़्शीगईतमकनत-ए-फ़क़्रकेसाथ
देनेवालेनेहमेंकौनसीदौलतनहींदी
बे-वफ़ादोस्तकभीलौटकेआएतोउन्हें
हमनेइज़हार-ए-नदामतकीअज़िय्यतनहींदी
दिलकभीख़्वाबकेपीछेकभीदुनियाकीतरफ़
एकनेअज्रदियाएकनेउजरतनहींदी
  - Iftikhar Arif
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