ye bastiyaan hain ki maqtal dua ki.e jaayen | ये बस्तियाँ हैं कि मक़्तल दु'आ किए जाएँ

  - Iftikhar Arif
येबस्तियाँहैंकिमक़्तलदु'आकिएजाएँ
दु'आकेदिनहैंमुसलसलदु'आकिएजाएँ
कोईफ़ुग़ाँकोईनालाकोईबुकाकोईबैन
खुलेगाबाब-ए-मुक़फ़्फ़लदु'आकिएजाएँ
येइज़्तिराबयेलम्बासफ़रयेतन्हाई
येरातऔरयेजंगलदु'आकिएजाएँ
बहालहोकेरहेगीफ़ज़ा-ए-ख़ित्ता-ए-ख़ैर
येहब्सहोगामोअ'त्तलदु'आकिएजाएँ
गुज़िश्तगान-ए-मोहब्बतकेख़्वाबकीसौगंद
वोख़्वाबहोगामुकम्मलदु'आकिएजाएँ
हवाएसरकशसफ़्फ़ाककेमुक़ाबिलभी
येदिलबुझेंगेमिशअलदु'आकिएजाएँ
ग़ुबारउड़ातीझुलसतीहुईज़मीनोंपर
उमँडकेआएँगेबादलदु'आकिएजाएँ
क़ुबूलहोनामुक़द्दरहैहर्फ़-ए-ख़ालिसका
हरएकआनहरइकपलदु'आकिएजाएँ
  - Iftikhar Arif
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