ghabra ga.e hain vaqt ki tanhaaiyon se ham | घबरा गए हैं वक़्त की तन्हाइयों से हम

  - Iffat Zarrin
घबरागएहैंवक़्तकीतन्हाइयोंसेहम
उकताचुकेहैंअपनीहीपरछाइयोंसेहम
सायामेरेवजूदकीहदसेगुज़रगया
अबअजनबीहैंआपशनासाइयोंसेहम
येसोचकरहीख़ुदसेमुख़ातिबरहेसदा
क्यागुफ़्तुगूकरेंगेतमाशाइयोंसेहम
अबदेंगेक्याकिसीकोयेझोंकेबहारके
माँगेंगेदिलकेज़ख़्मभीपुरवाइयोंसेहम
'ज़र्रीं'क्याबहारोंकोमुड़मुड़केदेखिए
मानूसथेख़िज़ाँकीदिल-आसाइयोंसेहम
  - Iffat Zarrin
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