manzilen aayein to raaste kho ga.e | मंज़िलें आईं तो रस्ते खो गए

  - Iffat Zarrin
मंज़िलेंआईंतोरस्तेखोगए
आबगीनेथेकिपत्थरहोगए
बे-गुनाहीज़ुल्मतोंमेंक़ैदथी
दाग़फिरकिसकेसमुंदरधोगए
उम्रभरकाटेंगेफ़सलेंख़ूनकी
ज़ख़्मदिलमेंबीजऐसाबोगए
देखकरइंसानकीबेचारगी
शामसेपहलेपरिंदेसोगए
अन-गिनतयादेंमेरेहमराहथीं
हमही'ज़र्रीं'दरमियाँमेंखोगए
  - Iffat Zarrin
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