rooh jismoon se baahar bhatkati rahi | रूह जिस्मों से बाहर भटकती रही

  - Iffat Zarrin
रूहजिस्मोंसेबाहरभटकतीरही
ज़ख़्मीयादोंकोआँचलसेढकतीरही
मेरेहाथोंमेंथींगर्दकीचादरें
ज़िंदगीथीकेदामनझटकतीरही
चाँदनीमेंहसींज़हरघुलतारहा
सरकोमरमरपेनागिनपटकतीरही
मैंघटाओंसेख़ुदकोबचातीरही
तेग़बिजलीकीसरपेलटकतीरही
मेरेहोंटोंकोकबमिलसकीबाँसुरी
साँस'ज़र्रीं'लबोंपेअटकतीरही
  - Iffat Zarrin
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