na ku-e-yaar men thehra na anjuman men raha | न कू-ए-यार में ठहरा न अंजुमन में रहा

  - Ibrahim Ashk
कू-ए-यारमेंठहराअंजुमनमेंरहा
अदा-ए-नाज़सेयेदिलसरा-ए-फ़नमेंरहा
हज़ारोंतूफ़ाँउठाएहैंवक़्तआनेपर
लहूभीख़ासअदासमिरेबदनमेंरहा
मैंएकरंगथारंग-ए-ख़याल-ए-आवारा
किसीधनकमेंकिसीरुतकेपैरहनमेंरहा
अनाहीथीकिझुकनेदियाकभीमुझको
पहाड़सरपेउठाकरभीबाँकपनमेंरहा
वोमैंहीथाकिकोईऔरथानहींमा'लूम
तमामउम्रजोमेरेहीजानतनमेंरहा
सफ़ीर-ए-जाँकेलिएमंज़िलेंनहींहोतीं
कोईपड़ावभीआयातोवोथकनमेंरहा
उठीजोसैफ़-ए-सितमबे-नियाज़-ए-मौत-ओ-हयात
क़लम-ब-दस्तखड़ावादी-ए-सुख़नमेंरहा
  - Ibrahim Ashk
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