sheeshe ka aadmi hooñ mirii zindagi hai kya | शीशे का आदमी हूँ मिरी ज़िंदगी है क्या

  - Ibrahim Ashk
शीशेकाआदमीहूँमिरीज़िंदगीहैक्या
पत्थरहैंसबकेहाथमेंमुझकोकमीहैक्या
अबशहरमेंवोफूलसेचेहरेनहींरहे
कैसीलगीहैआगयेबस्तीहुईहैक्या
मैंजलरहाहूँऔरकोईदेखतानहीं
आँखेंहैंसबकेपासमगरबेबसीहैक्या
तुमदोस्तहोतोमुझसेज़रादुश्मनीकरो
कुछतल्ख़ियाँहोंतोभलादोस्तीहैक्या
गर्दिश-ए-तलाशमंज़िलरास्ता
मेराजुनूँहैक्यामिरीआवारगीहैक्या
ख़ुशहोकेहरफ़रेबज़मानेकाखालिया
येदिलहीजानताहैकिदिलपरबनीहैक्या
दोबोलदिलकेहैंजोहरइकदिलकोछूसकें
'अश्क'वर्नाशे'रहैंक्याशा'इरीहैक्या
  - Ibrahim Ashk
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