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Shivam Mishra
lab the KHaamosh nazon ne hi baat ki
lab the KHaamosh nazon ne hi baat ki | लब थे ख़ामोश नज़रों ने ही बात की
- Shivam Mishra
लब
थे
ख़ामोश
नज़रों
ने
ही
बात
की
हमने
यूँँ
आख़िरी
वो
मुलाक़ात
की
सिर्फ़
पलकें
ही
थी
भीगती
रह
गईं
जाने
कैसे
ख़ुदा
ने
वो
बरसात
की
- Shivam Mishra
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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ये
है
पहली
बात
तुझ
सेे
इश्क़
है
दूसरी
ये
बात,
पहली
बात
सुन
Siddharth Saaz
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बूढ़ी
बोझल
सूखी
आँखें
देख
रही
हैं
हैरत
से
कच्ची
उम्र
के
लड़कों
ने
कुछ
ऐसी
बातें
लिक्खी
हैं
Shadab Javed
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वो
तिरे
नसीब
की
बारिशें
किसी
और
छत
पे
बरस
गईं
दिल-ए-बे-ख़बर
मिरी
बात
सुन
उसे
भूल
जा
उसे
भूल
जा
Amjad Islam Amjad
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वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आ
कर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
Zubair Ali Tabish
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भीगी
पलकें
देख
कर
तू
क्यूँँ
रुका
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
तो
मेरी
आँख
में
कुछ
आ
गया
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आकर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
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Zubair Ali Tabish
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हम
हार
गए
तुम
जीत
गए
हम
ने
खोया
तुम
ने
पाया
इन
छोटी
छोटी
बातों
का
हम
कोई
ख़याल
नहीं
करते
Wali Aasi
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बात
ये
है
कि
आदमी
शाइर
या
तो
होता
है
या
नहीं
होता
Mahboob Khizan
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जब
मसअले
न
हल
हो
सकें
बात-चीत
से
फिर
जंग
ही
लड़ो
कि
ज़माना
ख़राब
है
shaan manral
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होंटों
पर
इक
बार
सजा
कर
अपने
होंट
उस
के
बाद
न
बातें
करना
सो
जाना
Ateeq Allahabadi
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कोई
नहीं
है
जो
छुआ
हो
रूह
को
चाहत
सभी
को
जिस्म
की
ही
है
रही
Shivam Mishra
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तंग
आ
गया
मैं
इस
बनावटी
समाज
से
अब
मुझे
भी
सीखना
है
हर
फ़रेब
आज
से
उम्र
ये
तो
कट
रही
है
इंतिज़ार
में
ही
अब
ज़ख़्म
भी
मेरे
थके
हुए
हैं
हर
इलाज
से
याद
दिल
से
कब
किसी
की
कौन
है
मिटा
सका
कौन
है
जो
रौशनी
जुदा
करे
सिराज
से
कौन
है
यक़ीन
कर
रहा
किसी
पे
अब
यहाँ
है
जिसे
यक़ीन
वो
न
बच
सका
रिवाज
से
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Shivam Mishra
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सबको
हैरत
रही
उनके
दीदार
से
हमको
ज़ख़्मी
किया
अपने
किरदार
से
हाल
पूछो
तो
है
ख़ैरियत
सब
यहाँ
हैं
मगर
याद
में
उनके
बीमार
से
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Shivam Mishra
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शाम
बाँहों
में
उनकी
गुज़र
जाने
दे
वक़्त
अब
मुझको
थोड़ा
ठहर
जाने
दे
चल
चुका
हूँ
बहुत
मंज़िलों
के
लिए
भूल
राहों
के
अब
से
सफ़र
जाने
दे
रेत
साहिल
की
उड़ना
न
चाहे
है
अब
लहर
ख़ुद
को
किनारे
उतर
जाने
दे
है
तमन्ना
यही
फूल
बनकर
अभी
मुझको
राहों
में
उनकी
बिखर
जाने
दे
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Shivam Mishra
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वसिय्यत
में
मिली
है
दुश्मनी
हमको
यहाँ
साहब
नहीं
चर्चे
थे
कम
वर्ना
हमारी
दोस्ती
के
भी
Shivam Mishra
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