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Himanshi babra KATIB
sabne dil se use utaara tha
sabne dil se use utaara tha | सबने दिल से उसे उतारा था
- Himanshi babra KATIB
सबने
दिल
से
उसे
उतारा
था
वो
मरी
कब
थी
उसको
मारा
था
पैरों
में
गिरके
जीता
था
जिसको
उसको
पाने
में
ख़ुदको
हारा
था
तेरे
मेरे
में
बट
गया
सबकुछ
एक
टाइम
था
सब
हमारा
था
उसकी
यादों
में
दिल
जले
है
अब
जिसका
चेहरा
नहीं
गवारा
था
मैंने
वो
खोया
जो
मेरा
नहीं
था
तुमने
वो
खोया
जो
तुम्हारा
था
जीत
सकता
था
उस
सेे
मैं
कातिब
पर
बड़े
हौसले
से
हारा
था
- Himanshi babra KATIB
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अच्छे
हो
कर
लौट
गए
सब
घर
लेकिन
मौत
का
चेहरा
याद
रहा
बीमारों
को
Shariq Kaifi
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आज
भी
शायद
कोई
फूलों
का
तोहफ़ा
भेज
दे
तितलियाँ
मंडला
रही
हैं
काँच
के
गुल-दान
पर
Shakeb Jalali
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मैं
तो
'मुनीर'
आईने
में
ख़ुद
को
तक
कर
हैरान
हुआ
ये
चेहरा
कुछ
और
तरह
था
पहले
किसी
ज़माने
में
Muneer Niyazi
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ख़ुद
को
शीशा
कर
लिया
है
यार
मैंने
अब
तो
तेरा
देखना
बनता
है
मुझ
को
Neeraj Neer
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हम
ऐसों
को
बना
कर
के
ख़ुदा
उकता
गया
था
फिर
तेरी
आँखें
बना
डाली
तेरा
चेहरा
बना
डाला
Ankit Maurya
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तेरा
लिक्खा
जो
पढ़ूँ
तो
तेरी
आवाज़
सुनूँ
तेरी
आवाज़
सुनूँ
तो
तेरा
चेहरा
देखूँ
Bhaskar Shukla
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उतर
गया
है
चेहरा
तेरे
जाने
से
लॉक
नहीं
खुलता
है
अब
मोबाइल
का
Tanoj Dadhich
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तुम्हारा
दिल
मिरे
दिल
के
बराबर
हो
नहीं
सकता
वो
शीशा
हो
नहीं
सकता
ये
पत्थर
हो
नहीं
सकता
Dagh Dehlvi
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उनकी
आँखों
में
ये
आँखें
थी
और
इन
आँखों
में
वो
आईने
के
सामने
रक्खा
हुआ
था
आईना
Bhaskar Shukla
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इतना
प्यारा
है
वो
चेहरा
कि
नज़र
पड़ते
ही
लोग
हाथों
की
लकीरों
की
तरफ़
देखते
हैं
Nadir Ariz
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बात
ऐसी
है
ऐसा
था
पहले
दर्द
होने
पे
रोता
था
पहले
जैसे
चाहे
वो
खेला
करता
था
मैं
किसी
का
खिलौना
था
पहले
तुझपे
कितना
भरोसा
करता
था
ख़ुद
पे
कितना
भरोसा
था
पहले
आख़िरी
रास्ते
पे
चलने
को
पैर
उसने
उठाया
था
पहले
अब
तो
तस्वीर
तक
नहीं
बनती
मैं
तो
पैकर
बनाता
था
पहले
रौशनी
आई
जब
जला
कोई
सबकी
आँखों
पे
पर्दा
था
पहले
गिनती
पीछे
से
की
गई
वरना
मेरा
नंबर
तो
पहला
था
पहले
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मायूस
ज़िंदगी
से
तुझे
दर-किनार
कर
बैठी
हुई
हूँ
अपने
मुक़द्दर
से
हार
कर
मैं
कम-नसीब
उस
के
दिलासे
में
आ
गई
उस
ने
कहा
था
मुझ
से
मेरा
इंतिज़ार
कर
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Himanshi babra KATIB
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दुश्मनों
से
भी
दोस्ती
रक्खी
मैंने
हाथों
पे
ज़िंदगी
रक्खी
मेरे
हालात
चाहे
जो
भी
थे
तेरे
ख़ातिर
कभी
कमी
रक्खी
एक
लड़के
पे
ज़िंदगी
वारी
एक
लड़की
सदा
दुखी
रक्खी
हमने
तुझको
भुलाने
की
ख़ातिर
कैसे
कैसों
से
दोस्ती
रक्खी
मेरा
बर्बाद
होना
बनता
था
सब
सेे
पहले
तेरी
ख़ुशी
रक्खी
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उसने
दो
चार
कर
दिया
मुझको
ज़ेहनी
बीमार
कर
दिया
मुझको
क्यूँ
नहीं
दस्तरस
में
तू
मेरे
क्यूँ
तलबगार
कर
दिया
मुझको
कभी
पत्थर
कभी
ख़ुदा
उसने
चाहा
जो
यार
कर
दिया
मुझको
उस
सेे
कोई
सवाल
मत
करना
उसने
इंकार
कर
दिया
मुझको
एक
इंसान
ही
तो
माँगा
था
उसको
भी
मार
कर
दिया
मुझको
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मेरी
दुनिया
उजड़
गई
इस
में
तुम
इसे
हादसा
समझते
हो
आख़िरी
रास्ता
तो
बाक़ी
है
आख़िरी
रास्ता
समझते
हो
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Himanshi babra KATIB
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