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Himanshi babra KATIB
baat aisi hai aisa tha pahle
baat aisi hai aisa tha pahle | बात ऐसी है ऐसा था पहले
- Himanshi babra KATIB
बात
ऐसी
है
ऐसा
था
पहले
दर्द
होने
पे
रोता
था
पहले
जैसे
चाहे
वो
खेला
करता
था
मैं
किसी
का
खिलौना
था
पहले
तुझपे
कितना
भरोसा
करता
था
ख़ुद
पे
कितना
भरोसा
था
पहले
आख़िरी
रास्ते
पे
चलने
को
पैर
उसने
उठाया
था
पहले
अब
तो
तस्वीर
तक
नहीं
बनती
मैं
तो
पैकर
बनाता
था
पहले
रौशनी
आई
जब
जला
कोई
सबकी
आँखों
पे
पर्दा
था
पहले
गिनती
पीछे
से
की
गई
वरना
मेरा
नंबर
तो
पहला
था
पहले
- Himanshi babra KATIB
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हद
से
ज़्यादा
भी
प्यार
मत
करना
जी
हर
इक
पे
निसार
मत
करना
क्या
ख़बर
किस
जगह
पे
रुक
जाए
साँस
का
एतिबार
मत
करना
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Qamar Ejaz
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या
तेरे
अलावा
भी
किसी
शय
की
तलब
है
या
अपनी
मोहब्बत
पे
भरोसा
नहीं
हम
को
Shahryar
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वो
झूठ
बोल
रहा
था
बड़े
सलीक़े
से
मैं
एतिबार
न
करता
तो
और
क्या
करता
Waseem Barelvi
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तुम्हारी
ख़ानदानी
रस्म
रस्म-ए-बेवफ़ाई
है
हमीं
पागल
थे
जो
तुम
पर
भरोसा
कर
लिया
हमने
Shajar Abbas
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दीवारें
छोटी
होती
थीं
लेकिन
पर्दा
होता
था
तालों
की
ईजाद
से
पहले
सिर्फ़
भरोसा
होता
था
Azhar Faragh
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हर-चंद
ए'तिबार
में
धोके
भी
हैं
मगर
ये
तो
नहीं
किसी
पे
भरोसा
किया
न
जाए
Jaan Nisar Akhtar
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झूट
पर
उसके
भरोसा
कर
लिया
धूप
इतनी
थी
कि
साया
कर
लिया
Shariq Kaifi
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तुम
मिरी
ज़िंदगी
हो
ये
सच
है
ज़िंदगी
का
मगर
भरोसा
क्या
Bashir Badr
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उस
की
ख़्वाहिश
पे
तुम
को
भरोसा
भी
है
उस
के
होने
न
होने
का
झगड़ा
भी
है
लुत्फ़
आया
तुम्हें
गुमरही
ने
कहा
गुमरही
के
लिए
एक
ताज़ा
ग़ज़ल
Irfan Sattar
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हैं
बाशिंदे
उसी
बस्ती
के
हम
भी
सो
ख़ुद
पर
भी
भरोसा
क्यूँ
करें
हम
Jaun Elia
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मेरी
दुनिया
उजड़
गई
इस
में
तुम
इसे
हादसा
समझते
हो
आख़िरी
रास्ता
तो
बाक़ी
है
आख़िरी
रास्ता
समझते
हो
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Himanshi babra KATIB
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दुश्मनों
से
भी
दोस्ती
रक्खी
मैंने
हाथों
पे
ज़िंदगी
रक्खी
मेरे
हालात
चाहे
जो
भी
थे
तेरे
ख़ातिर
कभी
कमी
रक्खी
एक
लड़के
पे
ज़िंदगी
वारी
एक
लड़की
सदा
दुखी
रक्खी
हमने
तुझको
भुलाने
की
ख़ातिर
कैसे
कैसों
से
दोस्ती
रक्खी
मेरा
बर्बाद
होना
बनता
था
सब
सेे
पहले
तेरी
ख़ुशी
रक्खी
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सबने
दिल
से
उसे
उतारा
था
वो
मरी
कब
थी
उसको
मारा
था
पैरों
में
गिरके
जीता
था
जिसको
उसको
पाने
में
ख़ुदको
हारा
था
तेरे
मेरे
में
बट
गया
सबकुछ
एक
टाइम
था
सब
हमारा
था
उसकी
यादों
में
दिल
जले
है
अब
जिसका
चेहरा
नहीं
गवारा
था
मैंने
वो
खोया
जो
मेरा
नहीं
था
तुमने
वो
खोया
जो
तुम्हारा
था
जीत
सकता
था
उस
सेे
मैं
कातिब
पर
बड़े
हौसले
से
हारा
था
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आँख
को
आइना
समझते
हो
तुम
भी
सबकी
तरह
समझते
हो
दोस्त
अब
क्यूँ
नहीं
समझते
तुम
तुम
तो
कहते
थे
ना
समझते
हो
अपना
ग़म
तुमको
कैसे
समझाऊँ
सब
सेे
हारा
हुआ
समझते
हो
मेरी
दुनिया
उजड़
गई
इस
में
तुम
इसे
हादसा
समझते
हो
आख़िरी
रास्ता
तो
बाक़ी
है
आख़िरी
रास्ता
समझते
हो
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उसने
दो
चार
कर
दिया
मुझको
ज़ेहनी
बीमार
कर
दिया
मुझको
क्यूँ
नहीं
दस्तरस
में
तू
मेरे
क्यूँ
तलबगार
कर
दिया
मुझको
कभी
पत्थर
कभी
ख़ुदा
उसने
चाहा
जो
यार
कर
दिया
मुझको
उस
सेे
कोई
सवाल
मत
करना
उसने
इंकार
कर
दिया
मुझको
एक
इंसान
ही
तो
माँगा
था
उसको
भी
मार
कर
दिया
मुझको
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