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Himanshi babra KATIB
aankh ko aaina samjhte ho
aankh ko aaina samjhte ho | आँख को आइना समझते हो
- Himanshi babra KATIB
आँख
को
आइना
समझते
हो
तुम
भी
सबकी
तरह
समझते
हो
दोस्त
अब
क्यूँ
नहीं
समझते
तुम
तुम
तो
कहते
थे
ना
समझते
हो
अपना
ग़म
तुमको
कैसे
समझाऊँ
सब
सेे
हारा
हुआ
समझते
हो
मेरी
दुनिया
उजड़
गई
इस
में
तुम
इसे
हादसा
समझते
हो
आख़िरी
रास्ता
तो
बाक़ी
है
आख़िरी
रास्ता
समझते
हो
- Himanshi babra KATIB
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फ़न्न-ए-ग़ज़ल-आराई
दे
लहजे
को
सच्चाई
दे
दुनिया
है
जंगल
का
सफ़र
लछमन
जैसा
भाई
दे
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Tariq Shaheen
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सिर्फ़
ज़िंदा
रहने
को
ज़िंदगी
नहीं
कहते
कुछ
ग़म-ए-मोहब्बत
हो
कुछ
ग़म-ए-जहाँ
यारो
Himayat Ali Shayar
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जिसकी
ख़ातिर
हम
भुला
बैठे
हैं
दुनिया
दोस्तों
से
ही
उन्हें
फ़ुर्सत
नहीं
है
Shashank Shekhar Pathak
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जहाँ
जो
था
वहीं
रहना
था
उस
को
मगर
ये
लोग
हिजरत
कर
रहे
हैं
Liaqat Jafri
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ग़म
और
ख़ुशी
में
फ़र्क़
न
महसूस
हो
जहाँ
मैं
दिल
को
उस
मक़ाम
पे
लाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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दुनिया
ने
बोला
के
तुम
सेे
नहीं
होगा
अच्छा
है
मैं
थोड़ा
ऊँचा
सुनता
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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रात
की
भीगी-भीगी
मिट्टी
से
कुछ
उजाले
उगा
रही
होगी
मेरी
दुनिया
में
करके
अँधियारा
वो
दिवाली
मना
रही
होगी
Tanveer Ghazi
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नहीं
दुनिया
को
जब
परवाह
हमारी
तो
फिर
दुनिया
की
परवाह
क्यूँँ
करें
हम
Jaun Elia
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सुतून-ए-दार
पे
रखते
चलो
सरों
के
चराग़
जहाँ
तलक
ये
सितम
की
सियाह
रात
चले
Majrooh Sultanpuri
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इसी
होनी
को
तो
क़िस्मत
का
लिखा
कहते
हैं
जीतने
का
जहाँ
मौक़ा
था
वहीं
मात
हुई
Manzar Bhopali
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सबने
दिल
से
उसे
उतारा
था
वो
मरी
कब
थी
उसको
मारा
था
पैरों
में
गिरके
जीता
था
जिसको
उसको
पाने
में
ख़ुदको
हारा
था
तेरे
मेरे
में
बट
गया
सबकुछ
एक
टाइम
था
सब
हमारा
था
उसकी
यादों
में
दिल
जले
है
अब
जिसका
चेहरा
नहीं
गवारा
था
मैंने
वो
खोया
जो
मेरा
नहीं
था
तुमने
वो
खोया
जो
तुम्हारा
था
जीत
सकता
था
उस
सेे
मैं
कातिब
पर
बड़े
हौसले
से
हारा
था
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Himanshi babra KATIB
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उसने
दो
चार
कर
दिया
मुझको
ज़ेहनी
बीमार
कर
दिया
मुझको
क्यूँ
नहीं
दस्तरस
में
तू
मेरे
क्यूँ
तलबगार
कर
दिया
मुझको
कभी
पत्थर
कभी
ख़ुदा
उसने
चाहा
जो
यार
कर
दिया
मुझको
उस
सेे
कोई
सवाल
मत
करना
उसने
इंकार
कर
दिया
मुझको
एक
इंसान
ही
तो
माँगा
था
उसको
भी
मार
कर
दिया
मुझको
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मेरी
दुनिया
उजड़
गई
इस
में
तुम
इसे
हादसा
समझते
हो
आख़िरी
रास्ता
तो
बाक़ी
है
आख़िरी
रास्ता
समझते
हो
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Himanshi babra KATIB
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बात
ऐसी
है
ऐसा
था
पहले
दर्द
होने
पे
रोता
था
पहले
जैसे
चाहे
वो
खेला
करता
था
मैं
किसी
का
खिलौना
था
पहले
तुझपे
कितना
भरोसा
करता
था
ख़ुद
पे
कितना
भरोसा
था
पहले
आख़िरी
रास्ते
पे
चलने
को
पैर
उसने
उठाया
था
पहले
अब
तो
तस्वीर
तक
नहीं
बनती
मैं
तो
पैकर
बनाता
था
पहले
रौशनी
आई
जब
जला
कोई
सबकी
आँखों
पे
पर्दा
था
पहले
गिनती
पीछे
से
की
गई
वरना
मेरा
नंबर
तो
पहला
था
पहले
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दुश्मनों
से
भी
दोस्ती
रक्खी
मैंने
हाथों
पे
ज़िंदगी
रक्खी
मेरे
हालात
चाहे
जो
भी
थे
तेरे
ख़ातिर
कभी
कमी
रक्खी
एक
लड़के
पे
ज़िंदगी
वारी
एक
लड़की
सदा
दुखी
रक्खी
हमने
तुझको
भुलाने
की
ख़ातिर
कैसे
कैसों
से
दोस्ती
रक्खी
मेरा
बर्बाद
होना
बनता
था
सब
सेे
पहले
तेरी
ख़ुशी
रक्खी
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